बुढ़ापे में के कारण और उसके लक्षण | Dipression in Old Age in Hindi

बुढ़ापे में डिप्रेशन होना एक आम बात है, डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है जितना ही फिट और हेल्थी क्यों ना हो हम बात करेंगे ढलती हुई उम्र में डिप्रेशन होने के लक्षण और उसके कुछ कारण।

क्या आपने कभी किसी बूढ़े इंसान को डिप्रेशन में देखा है?

अगर आप ने देखा होगा तो आपने नोटिस किया होगा कि उस इंसान के जीवन में खुशी की बहुत ही कमी हो जाती है। यह बहुत दुख की बात है, हम और आप केवल यह अनुमान ही लगा सकते हैं कि जिसके साथ यह हो रहा है किस स्थिति से गुजर रहा होगा

इस तरह के डिप्रेशन आपके पिता, दादा, दादी, आपके पड़ोस में रहने वाले किसी बुजुर्ग को हो सकता है,

इस आर्टिकल से मेरा मकसद आपकोडराना नहीं है बल्कि अवगत कराना है और आपको कुछ लक्छण और कारणों के बारे में  बताना है ताकि समय आने पर आप ऐसे ही किसी व्यक्ति को, जिसे इस तरह का डिप्रेशन हुआ है, उसकी मदद कर सकें

इसमें आर्टिकल में आगे बढ़ने से पहले, मैं चाहता हूं कि आप यह छोटा सा वीडियो देखें

बुढ़ापे में डिप्रेशन

बुढ़ापे में डिप्रेशन एक बहुत ही कॉमन मेडिकल कंडीशन है मगर इसका इलाज संभव है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान उदासी और नकारात्मक सोच से गिरा हुआ रहता है | इतनी खतरनाक बीमारी होने के बावजूद भी से लोग इसे अनदेखा कर देते है।

अमेरिका में एक आंकड़े के अनुसार, 70 लाख अमेरिकंस, जिनकी उम्र 65 साल या से ज्यादा है, इस बीमारी का शिकार है

हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 10% लोगों इलाज हो पता है, जो कि काफी दुखद बात है

इसका मुख्य कारण है कि डॉक्टर्स इस डिप्रेशन के लक्षणों को पहचान नहीं पाते हैं, यह मरीज मेडिकल चेकअप के लिए जा नहीं पाते हैं और सोचते हैं कैसा केवल उम्र ढलने के कारण हो रहा है

दूसरे कारण यह भी है कि, हर मरीज के अंदर अलग तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, डॉक्टर इन लक्षणों को किसी और बीमारी के लक्षण समझकर उसका इलाज करने लगते हैं.

डिप्रेशन की बीमारी बुजुर्गों में किसी और बीमारी साथ भी हो सकती है, और यह हार्टअटैक और दूसरी जानलेवा बीमारियों का रिस्क बढ़ा देती हैं

डिप्रेशन होने के कारण दूसरी बीमारियों को सही होने में भी बहुत कठिनाई होती है, और डिप्रेशन में जो स्थिति होती है, उसे आत्महत्या से भी जोड़ा जाता है

बुढ़ापे में डिप्रेशन से जुड़े हुए कुछ रिस्क

जैसे जैसे हमारे बुजुर्गों की उम्र ढलती जाती है, वैसे उनमें डिप्रेशन का रिस्क बढ़ता जाता है, निम्नलिखित हैं

  • अकेला होना, अविवाहित होना, इत्यादि
  • बूढ़ी औरतों में डिप्रेशन का रिस्क उनके बायोलॉजिकल साइंस की वजह से और बढ़ जाता है, क्योंकि परिवार का भार अकसर औरतों पर ही रहता है, जैसे बच्चों का ख्याल रखना, घर का ख्याल रखना, यह सारी जिम्मेदारी औरतों पर आती है
  • परिवार, दोस्तों या समाज मैं सपोर्ट ना होना
  • कभी-कभी बुजुर्ग खुद ही, अपने इस डिप्रेशन को बताने से डरते हैं कि कहीं लोग उन्हें पागल या कमजोर ना समझ बैठे और कभी-कभी वह यह सोचते हैं कि परिवार को परेशानी में डालने से अच्छा है इस बीमारी को अंत तक झेलते रहो।

बुजुर्गों में डिप्रेशन के लक्षणों को कैसे पहचाने

ढलती उम्र में बहुत से बीमारियां शरीर को जकड़ लेती हैं इस अवस्था में यह समझना मुश्किल होता है यह लक्षण किसी शारीरिक बीमारी के हैं या फिर स्टेशन की वजह से हैं मगर आप फिर भी चीजों को नोटिस करके उनके डिप्रेशन के लक्षणों को पहचान सकते हैं

इस बात का ध्यान देकर क्या आपके बुजुर्ग

  • चिड़चिड़ा सा बर्ताव कर रहे हैं
  • एक तरफ अकेले उदास बैठे रहते हैं
  • रात को नींद से परेशान रहते हैं
  • खाने पीने में रूचि नहीं रखते हैं
  • जिन कामों में उन्हें मजा आता था अब वह उसे नहीं करते हैं
  • घर छोड़कर जाने की बात करते हैं
  • अपने शरीर को साफ सफाई से वंचित रखते हैं
  • अगर कुछ दवाई ले रहे हो तो उसे समय पर नहीं लेते हैं
  • चीजों को जल्दी भूल जाते हैं
  • मरने के बारे में सोचते रहते हैं

बुजुर्गों में डिप्रेशन के मुख्य कारण

जब हम डिप्रेस्ड होते हैं, अपने आपको हर चीज का जिम्मेदार समझते हैं, हमारे अंदर नकारात्मक सोच आ जाती है, हमारे आसपास की सभी होने वाली बुरी चीजों का जिम्मेदार हम अपने आप को लहराने लगते हैं

शारीरिक परेशानियां

बुढ़ापे की उम्र में शरीर कमजोर हो जाता है और तरह-तरह की बीमारियां शरीर को जकड़ लेती हैं, शरीर में दर्द रहना, रोज बीमार पड़ना, यह बहुत ही आम चीजें बन जाती हैं इन कारणों से डिप्रेशन भी हो सकता है।

अकेलापन और सबसे हटके रहना

अगर कोई बुजुर्ग अकेला रह रहा है, और सबसे हटके रह रहा है, उसका घूमना फिरना बाहर निकलना कम है तो यह आगे चलकर डिप्रेशन का रूप ले सकती है

किसी अपने को खो देना

परिवार में किसी की मृत्यु, किसी दोस्त को खो देना, या फिर किसी जानवर को भी खो देने पर जो दुख होता है ज्यादा समय के बाद वह डिप्रेशन का रूप ले सकता है,

जीवन का लक्ष्य खो देना

वृद्धावस्था में, अक्सर लोगों को जीने की चाह खत्म हो जाती है, उन्हें जीवन नीरस लगने लगता है यही कारण है कि यह ज्यादा देर तक होने पर डिप्रेशन का रुप ले लेती है

वृद्धावस्था मैं डिप्रेशन से बाहर निकलना

जैसा हमने इस आर्टिकल के शुरू में बताया था, की इस तरह का डिप्रेशन, सही इलाज से ठीक किया जा सकता है।

सबसे जरूरी है किसी साइकोलॉजिस्ट को दिखाएं, वहीं कुछ क्या बता सकते हैं जो कि डिप्रेशन को ठीक कर मदद कर सकती है

दवाइयों के साथ साथ साइकेट्रिस्ट कुछ और बातों की हिदायत देते हैं, जैसे कि अकेलेपन से दूर रहें, परिवार वालों के साथ या दोस्तों के साथ समय बिताएं

अपने आप को कभी खाली ना रहने दें

अच्छी डाइट लें साफ सुथरा खाना खाएं नींद पूरी करें इत्यादि चीजें इंसान को नॉर्मल जिंदगी जीने में काफी मदद करती हैं

इस आर्टिकल के अंत में मैं यह कहना चाहूंगा, कि अगर आपके आसपास ऐसे कोई लोग रहते हैं, यह कोई बुजुर्ग रहते हैं, उनका आदर करें उनकी बात माने उन्हें किसी बात का दुख ना होने दें,

भले ही वह अपनी जवान उम्र में कितनी भी बातें सुन जाते हो और उन्हें नजरअंदाज कर जाते हैं, वृद्धावस्था में छोटी से छोटी बात, इंसान के दिमाग में घर कर जाती है और वह किसी भी व्यक्ति के लिए बहुत ही खतरनाक चीज है .

उम्मीद करता हूं आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा, जानिए डॉट कॉम पर आप और भी अच्छे आर्टिकल्स पढ़ सकते हैं।

loading...